Tuesday, October 27, 2020
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    मोइन कुरैशी मामले में 3 पूर्व प्रमुखों से पूछताछ न करने पर सीबीआई की खिंचाई

    नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने मांस निर्यातक मोइन कुरैशी के खिलाफ कथित रिश्वत मामले के सिलसिले में पूर्व सीबीआई निदेशकों रंजीत सिन्हा, ए.पी. सिंह और आलोक वर्मा से पूछताछ नहीं किए जाने पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की खिंचाई की।

    अक्टूबर, 2018 में तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता, सतीश बाबू सना ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मोइन कुरैशी मामले की जांच में किसी भी कार्रवाई को नहीं करने के लिए अस्थाना को 2 करोड़ रुपये रिश्वत दी थी।

    एक चार्जशीट के अनुसार, कुरैशी सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में था। उसने विभिन्न व्यक्तियों से या तो सीधे या अपने एजेंटों के माध्यम से, जैसे कि सतीश बाबू सना के रूप में, सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामलों को प्रभावित करने के लिए धन एकत्र किया।

    सीबीआई के विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने एजेंसी के सामने छह सवाल रखे। एक सवाल में, उन्होंने पूछा कि वह उसने अपने पूर्व-निर्देशकों में से दो की भूमिका को लेकर उनसे पूछताछ क्यों नहीं की। इससे लगता है कि एजेंसी उनके खिलाफ जांच को आगे बढ़ाने के प्रति बहुत उत्सुक नहीं है।

    अदालत ने कहा, यह स्पष्ट है कि इस मामले में, इसके पूर्व-निदेशकों में से दो की भूमिका जांच के तहत है, जो कथित बिचौलिए मोइन अख्तर कुरैशी के साथ एपी सिंह और रंजीत सिन्हा हैं, मामले को खुले, ईमानदारी के साथ जांच की जाचने की जरूरत है।

    विशेष सीबीआई न्यायाधीश ने सीबीआई से कहा कि भारत की प्रमुख जांच एजेंसी के रूप में इसकी प्रतिष्ठित छवि है। हालांकि, साथ ही इसे प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए अपने दो शीर्ष पूर्व-माननीयों के खिलाफ आरोपों की जांच को बढ़ाना होगा।

    एक अन्य सवाल में, अदालत ने पूछा कि क्या मोइन कुरैशी मामले से जुड़े सीबीआई के एक अन्य पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    इसने यह भी पूछा कि सीबीआई ने संभावित संदिग्धों की खोज और हिरासत में पूछताछ जैसे जांच के तरीकों का इस्तेमाल करके जांच को तार्किक अंत तक क्यों नहीं लाया।

    कोर्ट ने पूछा कि ए.पी. सिंह की इस मामले में जांच क्यों नहीं हुई? यदि कोई निश्चित समय-सीमा नहीं दी जा सकती है, तो क्या इसका मतलब यह है कि जांच अनिश्चितकाल के लिए चलेगी, ताकि एफआईआर खुद ही खत्म हो जाए?

    अदालत ने 27 अक्टूबर, 2020 तक इन सवालों पर सीबीआई से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जब इस मामले पर आगे सुनवाई होगी।

    इसके अलावा, सीबीआई ने उन 9 सवालों के जवाब भी दिए, जो न्यायाधीश ने पहले पूछे थे। एजेंसी ने अदालत को अवगत कराया कि मामले के संबंध में अब तक 544 दस्तावेज एकत्र किए गए हैं और 63 गवाहों की जांच की गई है।

    यह पूछे जाने पर कि लोक सेवकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, जिनके लिए कुरैशी कथित रूप से एक बिचौलिया के रूप में काम कर रहा था तो एजेंसी ने कहा कि जांच की जा रही है और ऐसे लोक सेवकों की भूमिका की जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसी ने अदालत को आगे बताया कि इस मामले के संबंध में कई सीबीआई अधिकारियों की जांच की गई है, जिसमें आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के कुछ लोक सेवक भी शामिल हैं।

    वीएवी/एसजीके



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