Sunday, October 25, 2020
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    मप्र में कोरोना काल में बालिकाओं ने लिखी नई इबारत

    भोपाल। कोरोना के खिलाफ मध्यप्रदेश में बालिकाओं ने न सिर्फ लड़ाई लड़ी, बल्कि नई इबारत भी लिखी है। बालिकाएं जहां एक ओर लोगों को जागृत करने में लगी हैं, तो दूसरी ओर जरूरतमंद बच्चों की मदद भी कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर राज्य के विभिन्न हिस्सों की बालिकाओं ने कोरोना काल में किए गए चुनौतीपूर्ण कार्यों का ब्योरा सोशल मीडिया पर आयोजित चॉक टॉक वेबीनार में सिलसिलेवार दिया। यह बेविनार बाल संरक्षण आयोग, बच्चों की पैरवी करने वाली गैर सरकारी संस्था चाइल्ड राइट ऑब्जर्वेटरी और यूनिसेफ ने मिलकर किया।

    सिंगरौली की छात्रा महिमा और उनकी शिक्षिका ऊषा दुबे ने बताया कि कोरोना काल में बच्चों में पढ़ने की ललक पैदा करने के मकसद से उन्होंने किस तरह से एक पुस्तकालय चलाया और गांव-गांव जाकर बच्चों में कहानियां पढ़ने की ललक पैदा की, इसी तरह दतिया की ब्रज पांचाल और ज्योति ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए लोगों में चलाए गए जागृति अभियान का सिलसिलेवार ब्योरा दिया।

    शिवपुरी जिले की 12वीं की छात्रा राधिका ने बताया कि उसने कोरोना काल में गांव-गांव जाकर बच्चों को किताबें उपलब्ध कराईं और सप्ताह में एक उनकी कक्षा लगाकर बच्चों के सवालों का जवाब दिया और उन्हें पढ़ाया। हरदा जिले के टिमरनी में पलक राजपूत ने बालिकाओं के अधिकार और समाज में व्याप्त कुरीतियों के प्रति जागृति लाने का काम किया। रीवा में आस्था सिंह ने गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम किया। टीकमगढ़ की क्रांति देवी केवट ने भी अपने गांव लौटे मजदूरों के बच्चों के लिए खास अभियान चलाया।

    इस वेबीनार में बाल आयोग के सदस्य बृजेश चौहान ने भी हिस्सा लिया और बच्चों की कहानी को प्रेरणादाई बताया, साथ ही भरोसा दिलाया कि बच्चों को जो भी जरूरत होगी वह उसकी हर संभव मदद के प्रयास करेंगे।

    वेबीनार का संयोजन यूनिसेफ के संचार विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने किया और कहा कि बालिकाओं से जुड़े मसलों पर खास जोर देने की जरुरत है क्योंकि उनके सामने कई चुनौतियां है। वहीं मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव और सीआरओ की अध्यक्ष निर्मला बुच ने कहा कि बालिका का काम यह बताता है कि वे कितनी उत्साही हैं और अच्छे-अच्छे काम कर रही हैं, बालिकाओं की यह कहानी बताती है कि उन्होंने जो बताया है उससे कहीं ज्यादा बेहतर काम किया गया होगा, उनकी कोशिशें दूसरों के लिए प्रेरणादायी हैं।

    बेविनार में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों ने बालिकाओं को भरोसा दिलाया कि उनके साथ वे खड़े है, उनकी हर जरुरत को पूरा करने के प्रयास किए जाएंगे और अगर कोई समस्या आती है तो उसका निदान भी किया जाएगा।



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