Friday, January 22, 2021
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    26/11 हमला : न्याय बस 50 प्रतिशत हुआ, पाक ने नहीं की कार्रवाई

    मुंबई, 25 नवंबर (आईएएनएस)। 26 नवंबर (शुक्रवार) को साल 2008 में हुए हमले के 12 साल पूरे होने जा रहे हैं। इसी दिन हथियारों से लैस 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने नृशंस कृत्य को अंजाम दिया था, जिसमें सैकड़ों लोगों ने जान गवां दी थी। उस हृदयविदारक हमले को इतने साल बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ितों को अभी भी पूरी तरह से न्याय नहीं मिला है।

    विशेष सरकारी अभियोक्ता उज्जवल निकम ने कहा, जहां तक हमलावरों की बात है, भारत ने मामले में पूरा न्याय किया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। हम उन मुख्य अपराधियों की गिरफ्तारी और सजा दे कर पूर्ण न्याय चाहते हैं जो वर्तमान में पाकिस्तान में छिपे हुए हैं।

    वैश्विक ध्यान आकर्षित करने वाले हाई-प्रोफाइल मामले की देखरेख करने वाले सेलिब्रिटी वकील ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर हाफिज सईद और जकीउर रहमान लखवी जैसे मुख्य साजिशकर्ता और योजनाकार भारत में आरोपी होने के बावजूद अभी भी आराम से हैं।

    गौरतलब है कि भारत ने बीते पखवाड़े में औपचारिक रूप से मांग की थी कि पाकिस्तान 26/11 हमलों के मुकदमे में अपने अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करने में अपने आपत्तिजनक और कमजोर रणनीति का त्याग करे।

    एमईए प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि यहां तक कि अन्य देशों ने भी पाकिस्तान से हमलों के अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाने का आह्वान किया है।

    श्रीवास्तव ने कहा, यह गंभीर चिंता का विषय है कि भारत द्वारा साझा किए गए अपने स्वयं के सार्वजनिक स्वीकृति के साथ-साथ सभी आवश्यक साक्ष्यों को उपलब्ध कराने के बावजूद पाकिस्तान 15 देशों के 166 पीड़ितों के परिवारों को न्याय दिलाने में ईमानदारी नहीं दिखा रहा है, जबकि दुनिया 26/11 हमले की 12 वीं वर्षगांठ के करीब पहुंच चुकी है।

    निकम ने कहा कि भारतीय पक्ष की ओर से मामले में 50 प्रतिशत न्याय किया गया है, लेकिन 166 पीड़ितों को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान द्वारा अभी भी कार्रवाई किया जाना बाकी है और कई विदेशी नागरिकों सहित घायलों के साथ न्याय किया जाना बाकी है।

    उन्होंने कहा कि भारत ने सिर्फ कसाब के बारे में ही नहीं, बल्कि डेविड कोलमैन हेडली के बारे में भी पर्याप्त सबूत दिए थे, जिसमें उसके लश्कर और पाकिस्तान के आईएसआई के बीच घनिष्ठ संबंध का खुलासा किया गया था, इसके अलावा उनके (लश्कर-आईएसआई) के बीच ईमेल आदान-प्रदान के दस्तावेजी साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए हैं।

    निकम ने कहा, हेडली ने शिकागो कोर्ट में साक्ष्य उपलब्ध कराए थे, जिसे बाद में अमेरिकी प्रशासन द्वारा भी स्वीकार कर लिया गया और उसके बाद उसे दोषी ठहराया गया और 35 साल जेल की सजा मिली। वह वर्तमान में अमेरिकी जेल में सजा काट रहा है।

    उन्होंने आगे कहा कि, याचिका सौदा के अनुसार, भारत ने फरवरी 2018 में वीडियो-कांफ्रेंस द्वारा हेडली के सबूतों का संज्ञान लिया और अपने सबूतों को दर्ज करने या भारत द्वारा प्रदान किए गए मूर्त प्रमाण को स्वीकार करने के लिए अब पाकिस्तान की बारी थी।

    निकम ने कहा कि भारत ने बार-बार पाकिस्तान से कहा है कि वह अपने देश में छिपे 26/11 के अपराधियों पर मुकदमे में तेजी लाए, वीडियो-कॉन्फ्रेंस के जरिए भारतीय गवाहों की जांच करें, या उनके बयान दर्ज करने के लिए भारत में एक न्यायिक आयोग भेजे, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

    भारत ने एक कदम आगे बढ़ते हुए खूंखार आतंकवादी सैयद जबीउद्दीन अंसारी उर्फ अबू जिंदल को गिरफ्तार कर लिया, जिसने कराची से लश्कर के आतंकवादियों को नियंत्रित किया और 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई में तबाही मचाने के दौरान 10 आतंकवादियों का हमले के अंत तक मार्गदर्शन किया।

    निकम ने कहा, अबू जिंदल ने आतंकवादी हमले के दौरान अपनी भूमिका कबूल की है, दुर्भाग्य से वह लखवी और अन्य एजेंसियों जैसे लश्कर के मास्टरमाइंड के साथ जुड़ा हुआ था, इन सब के बावजूद पाकिस्तान ने पूरी तरह से न्याय दिलाने के लिए चीजों को आगे नहीं बढ़ाया है।

    वर्तमान में अबू जिंदल का मुंबई की विशेष अदालत में ट्रायल चल रहा है। यह ट्रायल एकमात्र ऐसा मामला है, जो 26/11 की घटना से जुड़ा हुआ है, जिसका निपटान किया जाना बाकी है। जिंदल को नई दिल्ली के अंतर्राष्ट्रीय इंदिरा गांधी हवाई अड्डे से 25 जून, 2012 को गिरफ्तार किया गया था।

    हालांकि सामने आने वाले सकारात्मक परिणाम यह रहे कि 26/11 के बाद महाराष्ट्र में एक भी आतंकी हमला नहीं हुआ है। साथ ही भारतीय केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियों ने भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना से निपटने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है।

    एमएनएस-एसकेपी



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