Thursday, January 28, 2021
More
    Home Politics Explainer: जानिए सौरव गांगुली से अस्पताल में मिलने क्यों पहुंच रहे इतने...

    Explainer: जानिए सौरव गांगुली से अस्पताल में मिलने क्यों पहुंच रहे इतने राजनेता, क्या है इन मुलाकातों के राजनीतिक मायने?

    डिजिटल डेस्क, कोलकाता। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के प्रेसिडेंट सौरव गांगुली माइल्ड कार्डिएक अरेस्ट के बाद से कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में गांगुली से अस्पताल में मिलने के लिए एक तरह से राजनेताओं की कतार लग गई। पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने अस्पताल का दौरा किया और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गांगुली से फोन पर बात की। इन मुलाकातों के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों में सौरव गांगुली क्यों इतने ज्यादा महत्वपूर्ण है?

    बंगाल में सौरव गांगुली का महत्व
    सौरव गांगुली बंगाल के उन कुछ व्यक्तियों में से एक हैं जिन्हें समाज के सभी वर्गों द्वारा प्यार और सम्मान दिया जाता है। गांगुली को प्यार से दादा (बंगाली में बड़ा भाई) कहा जाता है, जो कि गांगुली के नाम का पर्याय बन गया है। चूंकि उन्होंने 1996 में इंग्लैंड में अपने टेस्ट मैच की शुरुआत में शतक बनाया था, इसलिए सौरव गांगुली बंगाल में एक स्पोर्ट्स आइकन रहे हैं। 2000 में भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाए जाने के बाद उन्हें देश और राज्य में व्यापक लोकप्रियता मिली। 2002 में नेटवेस्ट फाइनल के बाद लॉर्ड्स में गांगुली का शर्ट लहराने का किस्सा भी काफी मशहूर हुआ था। टीम को 2003 के विश्व कप फाइनल में पहुंचाने के बाद गांगुली ने खुद को देश में सबसे लोकप्रिय बंगाली आइकन के रूप में सफलतापूर्वक स्थापित किया। 

    इसके बाद जब वह आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के साथ जुड़े तब भी उनकी लोकप्रियता बनी रही। इतना ही नहीं गांगुली जब अप्रैल 2012 में आईपीएल टीम पुणे वॉरियर्स इंडिया के लिए अपने प्रिय ईडन गार्डन्स पर केकेआर के खिलाफ खेलने आए, तो स्टेडियम में मौजूद भावुक प्रशंसक डिवाइड हो गए। गांगुली बंगाली फैन्स के लिए कितने बड़े आइकन थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है। क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से रिटायरमेंट के बाद गांगुली 2015 से अक्टूबर 2019 तक क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) के प्रेसिडेंट रहें। उन्हें बंगाल क्रिकेट में कई बदलाव लाने के लिए जाना जाता हैं। अक्टूबर 2019 में वह बीसीसीआई के प्रेसिडेंट बने।

    क्यों लग रही गांगुली के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें?
    बीसीसीआई के प्रेसिडेंट बनने के बाद से ही उनके राजनीति में शामिल होने के कयास लगने शुरू हो गए थे। ऐसा भी कहा जाना शुरू हो गया था कि बीजेपी बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी को टक्कर देने के लिए गांगुली को पार्टी का मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि गांगुली और भाजपा दोनों ने इस पर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा, लेकिन हाल ही में हुए एक डेवलपमेंट ने एक बार फिर पूर्व क्रिकेटर के भाजपा में शामिल होने की अटकलों को हवा दे दी। 27 दिसंबर को गांगुली ने राजभवन में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मुलाकात की। हालांकि धनखड़ ने कहा कि उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर गांगुली के साथ बातचीत की। गांगुली ने भी मीडिया से कुछ भी (उनके भाजपा में शामिल होने की) अटकलें नहीं लगाने को कहा।

    गांगुली की उपस्थिति, चुनावी संभावनाओं को दोगुना करेगी
    अगले दिन गांगुली फिरोज शाह कोटला मैदान में दिखे जहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटली की एक प्रतिमा का अनावरण किया। इस घटना ने अटकलों को और हवा दी। बता दें कि बंगाल के लोगों के बीच गांगुली की अपार लोकप्रियता के कारण, जो भी उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करता है, उसे बंगाल के चुनाव में बढ़त मिलने की पूरी-पूरी संभावना है। किसी भी पार्टी में इस कद के व्यक्ति की उपस्थिति, चुनावी संभावनाओं को दोगुना कर देगी और बंगाल की राजनीति में विशेषकर अप्रैल-मई में होने वाले चुनावों में बदलाव का कारण बन सकती है। कई अवसरों पर, भाजपा नेताओं ने संकेत दिया है कि गांगुली जैसे व्यक्ति को अपनी प्रशासनिक क्षमताओं के लिए राजनीति में आना चाहिए।

    टीएमसी का सौरव गांगुली से अच्छा रिश्ता
    दूसरी तरफ टीएमसी ने भी सौरव गांगुली से हमेशा अच्छा रिश्ता रखा है। ऐसे में टीएमसी की पूरी-पूरी कोशिश होगी कि वह गांगुली को बीजेपी में शामिल ना होने दे। ऐसा भी माना जाता है कि बंगाल में कई लोग नहीं चाहते कि गांगुली राजनीति में आएं। टीएमसी समेत कई राजनैतिक दल इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ है। राज्य में अपना राजनीतिक स्थान खोने वाली कांग्रेस और सीपीएम के लिए गांगुली का राजनीति में प्रवेश नहीं करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा।

    गांगुली से अस्पताल में अब तक कौन-कौन लोग मिल चुके हैं?
    गांगुली से मिलने जाने वालों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, केंद्रीय राज्य मंत्री (वित्त और कॉर्पोरेट मामले) अनुराग ठाकुर, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, भाजपा के राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता, राज्य के मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय और अरूप विश्वास, कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम, टीएमसी विधायक और दिवंगत बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया की बेटी बैशाली डालमिया, वरिष्ठ कांग्रेस नेता अब्दुल मन्नान और प्रदीप भट्टाचार्य और सीपीएम विधायक अशोक भट्टाचार्य।



    Source link

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Most Popular

    Recent Comments