Friday, January 22, 2021
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    Bhaskar Special: एक सन्यासी और शैतान के बीच हुई डील से जन्मी, ये है दुनिया की सबसे ख़तरनाक Book


    डिजिटल डेस्क ( भोपाल)।  क्या आपने दुनिया की सबसे खतरनाक किताब के बारे में सुना है। एक ऐसी किताब जो 700 साल के बाद भी एक रहस्य है। कहा जाता है कि यह शैतान की सबसे बड़ी किताब है। एक ऐसी किताब, जिसकी पास भी पहुंची उसका दिमागी संतुलन बिगड़ गया, पागल हो गया या उसकी जान चली गई। एक ऐसी किताब जिसमें लिखे हुए शब्द, कई चश्मदीद हैं, जिनका कहना है कि जब उन्होंने किताब को पढ़ना शुरू किया तो वो अक्षर हवा में तैरते हुए नजर आए और उन अक्षरों में शौले थे, आग थी। इसलिए इस पुस्तक का नाम devils bible पड़ा क्योंकि इसे किसी दैवीय शक्ति ने नहीं, बल्कि एक शैतानी शक्ति की प्रेरणा के जरिये लिखा गया है। ये पुस्तक जहां भी जिसके भी पास जाती उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता था। तो ये इस किताब की कहानी है। 

    कागज पर नहीं, जानवर के चमड़े पर लिखी गई…

    यह सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि हकीकत है और यह किताब आज भी एक शहर की लाइब्रेरी में मौजूद है। इस किताब के बारे में दुनिया में कई लोगों के पास जानकारी भी है। लेकिन कहते हैं कि इस किताब को एक शैतान ने लिखी थी, अब यह सोचने वाली बात हो जाती है कि क्या कोई शैतान किताब लिख सकता है। इस किताब को लिखने की कहानी इतनी दिलचस्प है कि समझ नहीं आता कि क्या सच है और क्या झूठ है। कहते हैं कि यह किताब एक रात में ही लिखी गई। दुनिया के जितने भी ज्यादातर जानकार हैं और एक्सपर्ट हैं, जिन्होंने इस किताब पर रिसर्च की, उनका मानना है कि एक रात में एक ही आदमी इस किताब को एक ही हैंडराइटिंग में कैसे लिख सकता है। लोगों का कहना है कि अगर एक ही आदमी इस किताब को लिखे तो भी उसे कम से कम 25 साल लग जाएंगे। ये किताब कागज के ऊपर नहीं लिखी गई, ये किताब चमड़े के ऊपर, जानवर के चमड़े के ऊपर लिखी गई। वो भी एक रात में और यहीं बात कोई मानने को तैयार नहीं है कि एक रात में इसे कोई लिख सकता है। 

    ये किताब है क्या…

    इस किताब का नाम द डेविल बाइबल है यानी की शैतान की किताब। यह किताब एक और नाम से पूरी दुनिया में मशहूर है (कोडेक्स गिगास)। इस किताब में कुल 310 पन्ने हैं और सभी चमड़े के हैं। कहते हैं कि इस किताब को लिखने के लिए 160 गधों का इस्तेमाल किया गया और उनकी चमड़ी पर यह किताब लिखी गई। यह किताब 36 इंच लंबी है, 23 इंच चौड़ी है। इसका वजन लगभग 85 किलो है। इस किताब को एक आदमी अकेले नहीं उठा सकता, कम से कम दो लोगों की जरूरत पड़ेगी। 

    13वीं सदी में एक सन्यासी हुआ करते थे। वो एक मठ में रहा करते थे और कुछ समय बाद वह मठ के नियमों का उल्लंघन करने लगे। यह बात फैली, वहां के राजा तक। यह चेक गणराज्य के समय की बाात है। उस सन्यासी को इस अपराध के जुर्म में राजा के पास पेश किया गया। राजा ने जांच कमेठी बनाई और जब यह साबित हो गया कि सन्यासी ने मठ के नियम तोड़े हैं तो सजा के तौर पर राजा ने उसे जिंदा दीवार में चुनवा दिया। अब इसमें दो चीजें, एक जगह दीवार की बात है और एक जगह लिखा गया है कि जिंदा ताबूद में दफना दिया गया। अब सन्यासी की मौत तय थी और ऐसे में उस सन्यासी ने राजा के सामने एक प्रस्ताव रखा कि वो एक ऐसी किताब लिखेगा कि वह पूरी मानवजाति के लिए एक बेहद अच्छी किताब होगी और यह किताब मठ को हमेशा के लिए गौरवांवित कर देगी। 

    अब राजा ने उस सन्यासी के सामने शर्त रखी कि ठीक है, लेकिन तुम्हें यह किताब एक रात में लिखनी होगी। अगर तुमने ऐसा किया तो सुबह तुम्हारी सजा माफ कर देंगे और तुम्हें जिंदा छोड़ देंगे। सन्यासी ने राजा की यह शर्त मान ली। वह किताब लिखने बैठा लेकिन आधी रात उसने हार मान ली कि वह सुबह तक किताब नहीं लिख पाएगा। अब उसके सामने दो रास्ते थे। सुबह का इंतजार करना या किताब को पूरी करना। इसी बीच सन्यासी ने एक विशेष प्राथना की और इस पूजा के जरिए शैतान को बुलाया। शैतान जैसे ही सन्यासी के सामने प्रकट हुआ तो सन्यासी ने उससे कहा कि अगर शैतान उसकी इस किताब को सुबह होने से पहले पूरी कर देगा तो सन्यासी अपनी आत्मा शैतान को सौंप देगा। शैतान ने सन्यासी की यह बात मान ली और किताब पूरी कर दी। सुबह जैसे ही सन्यासी ने किताब के पन्ने पलटे तो पहले ही पेज पर शैतान की तस्वीर थी। इसके अलावा सूरज और चांद की भी तस्वीरें थी। इसमें स्वर्ग की भी तस्वीरें हैं। इस किताब में भलाई और बुराई को बताया गया है। इस किताब में वर्णन है कि शैतान की पूजा को। शैतान को मानो। शर्त के मुताबिक, सुबह शैतान ने सन्यासी की आत्मा को अपने कब्जे में ले लिया और सुबह जब राजा के लोग आए और उन्होंने जैसे ही किताब को खोला तो कईयों ने अपना दिमागी संतुलन खो दिया और पहले ही दिन से यह किताब चर्चा का विषय बन गई। 

    क्योंकि यह बात कोई मानने को तैयार ही नहीं था कि यह एक रात में लिखी गई है। ऐसे में यह धारणा बन गई कि इस किताब को शैतान ने ही लिखा है और इसका नाम रखा गया ‘द डेविल बाइबल’। यह किताब शैतानी रास्ते पर ले जाने की प्रेरणा देती है। आज भी यह किताब चेक गणराज्य की एक लाइब्रेरी में सुरक्षित रखी हुई है। 



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