Saturday, April 17, 2021
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    राहुल गांधी ने इंदिरा के आपातकाल को बताया गलत, बोले- वह फैसला गलत था, लेकिन तब जो हुआ और आज जो हो रहा, उसमें अंतर है

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को अमेरिका के कॉर्नेल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और अर्थशास्त्री कौशिक बसु से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बात की। इस दौरान राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी के शासनकाल में लगाए गए आपातकाल को गलत बताया। हालांकि, उन्होंने यह बात मौजूदा मोदी सरकार के संदर्भ में कही। राहुल ने कहा कि इमरजेंसी एक गलती थी, पर उस वक्त जो हुआ और आज जो देश में हो रहा है, दोनों में फर्क है।

    राहुल गांधी ने कहा कि हमें संसद में बोलने की अनुमति नहीं है, न्यायपालिका से उम्मीद नहीं है, RSS-BJP के पास बेतहाशा आर्थिक ताकत है। व्यवसायों को विपक्ष के पक्ष में खड़े होने की इजाजत नहीं है। लोकतांत्रिक अवधारणा पर ये सोचा-समझा हमला है। मणिपुर में राज्यपाल BJP की मदद कर रहे हैं, पडुचेरी में उपराज्यपाल ने कई बिल को पास नहीं होने देना, क्योंकि वो RSS से जुड़ी थीं। कांग्रेस ने कभी भी संस्थानों का फायदा उठाने की कोशिश नहीं की। वर्तमान सरकार भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है।

    राहुल गांधी ने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी में अंदरुनी लोकतंत्र को बढ़ावा देने की बात कई सालों से कर रहा हूं। इसके लिए मेरी ही पार्टी के लोगों ने मेरी आलोचना की थी। मैंने अपनी पार्टी के लोगों से कहा कि पार्टी में अंदरुनी लोकतंत्र लाना निश्चित तौर पर जरूरी है। आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं इसलिए प्रभावी हैं, क्योंकि उनके पास स्वतंत्र संस्थाएं हैं। लेकिन, भारत में उस स्वतंत्रता पर हमला किया जा रहा है।

    कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र का पक्षधर हूं
    राहुल गांधी ने कहा कि मैं एक दशक से कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र का पक्षधर रहा हूं। मैंने युवा और छात्र संगठन में चुनाव को बढ़ावा दिया है। मैं पहला व्यक्ति हूं, जिसने पार्टी में लोकतांत्रिक चुनावों को महत्वपूर्ण माना है। हमारे लिए कांग्रेस का मतलब आजादी के लिए लड़ने वाली संस्था, जिसने भारत को संविधान दिया है। हमारे लिए लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं बरकरार रखना महत्वपूर्ण है।

    कौन हैं कौशिक बसु
    राहुल के साथ चर्चा में भाग लेने वाले कौशिक बसु प्रख्यात अर्थशास्त्री हैं। वह साल 2012 से 2016 तक विश्व बैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री रहे हैं। वह भारत सरकार के लिए भी मुख्य आर्थिक सलाहकार के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं।

    खबर में खास

    • 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया था। 
    • यह मार्च 21 मार्च 1977 तक यानी 21 महीने चला था। 
    • आपातकाल की घोषणा के साथ ही सभी नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। 
    • 25 जून की रात से ही देश में विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो गया था। 
    • जयप्रकाश नारायण, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नांडिस आदि बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। 
    • आपातकाल लागू के बाद प्रशासन और पुलिस द्वारा किए गए उत्पीड़न की कई खबरें सामने आई थीं। 
    • इस दौरान मीडिया पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। 
    • सरकार ने हर समाचार पत्र के कार्यालय में सेंसर अधिकारी बैठा दिए थे। 
    • स्पष्ट आदेश था कि अधिकारी की अनुमति के बिना कोई समाचार प्रकाशित नहीं हो सकता था। 
    • सरकार विरोधी समाचार प्रकाशित करने पर गिरफ्तारी हो सकती थी। 
    • यह सब तब रुका, जब 23 जनवरी 1977 को मार्च में चुनाव की घोषणा कर दी गई।

    इंदिरा गांधी ने क्यों लगाया था आपातकाल
    1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। लेकिन, इंदिरा की जीत पर सवाल उठाते हुए उनके प्रतिद्वंद्वी राजनारायण अदालत पहुंच गए थे। इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण ने उन पर चुनाव जीतने के लिए गलत तरीकों का प्रयोग करने का आरोप लगाया था। मामले में चुनाव को निरस्त कर दिया गया और इसी के चलते उन्होंने आपातकाल लगा दिया था।



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