Friday, March 5, 2021
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    हनुमान पांडेय को सीधा समझते थे गांव वाले, इस तरह से मुख्तार गैंग से जुड़ा और सर्खियों में आया


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    वर्ष 2005 में उस समय मऊ जिले के लीलारी भरौली गांव के लोगों ने जाना कि रिटायर फौजी बालदत्त पांडेय के बडे बेटे राकेश पांडेय उर्फ हनुमान को वे सीधा सदा युवक समझते थे, उसके संबंध कुख्यात अपराधियों से भी हैं। तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई की टीम को हनुमान की संलिप्तता के संकेत मिले तो टीम ने रात में हनुमान के घर पर छापा मारा था। हालांकि उस समय सीबीआई की टीम मौके पर राकेश उर्फ हनुमान नहीं मिला।
    हत्याकांड में शामिल बदमाश सीबीआई टीम के आने की भनक पहले ही लगने पर वह वहां से फरार हो गया था। लेकिन सीबीआई के हाथ हनुमान के शामिल रहने से लेकर हत्या के बाद बदमाशों के असलहों सहित अपने घर संरक्षण देने के पुख्ता संकेत मिले थे। सर्विलांस के माध्यम से सीबीआई ने ये तथ्य जुटाए थे। गांव के लोग उस समय हैरत में पड़ गए थे। फिर तो हनुमान का नाम मुख्तार के करीबी बड़े अपराधियों में शामिल हो गया।

    वर्ष 2009 में 29 अगस्त की शाम को जिले में पीडब्ल्यूडी के ए क्लास ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की हत्या में भी मुख्तार के करीबी शूटर हनुमान पांडेय का नाम आया। शहर के व्यस्ततम गाजीपुर तिराहा पर 29 अगस्त 2009 की सरेशाम गोलियों से छलनी करके मन्ना सिंह की हत्या कर दी गई थी।

    इसके बाद तत्कालीन एआरटीओ आफिस हकीकतपुरा पर मन्ना सिंह के करीबी राम सिंह मौर्य और गनर सिपाही सतीश कुमार की दोहरे हत्याकांड में भी राजा चौहान सहित कई हत्यारों के साथ हनुमान पांडेय का नाम आया। हनुमान के खिलाफ दक्षिण टोला में मुकदमा दर्ज है।

    मऊ जिले में हनुमान के खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज हैं। हत्या के दो मुकदमे (एक शहर कोतवाली और एक दक्षिण टोला थाना में), गैंगेस्टर के दो मुकदमे तथा साक्ष्य छिपाकर लाइसेंसी असलहा लेने के आरोप में कोपागंज थाने में एक मुकदमा दर्ज हैं। इसके अलावा जबकि पांच मुकदमे लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली और गाजीपुर में अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। हनुमान पांडेय पर कुल दस अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

    हनुमान पांडेय के विरुद्ध दर्ज मुकदमे:
    1. सबसे पहले लखनऊ में शहर कोतवाली  में 1993 में हत्या और हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराएं।
    2. रायबरेली जिले में शहर कोतवाली में वर्ष 2000 में हत्या और हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराएं।
    3. रायबरेली में शहर कोतवाली में साल 2000 में आयुध अधिनियम
    4. गाजीपुर जिले के भांवरकोल थाने में वर्ष 2005 में सीएल 7एक्ट 
    5. मऊ जनपद के शहर कोतवाली में वष 2009 में ठेकेदार मन्ना सिंह हत्याकांड में हत्या 
    6. मऊ जनपद के शहर कोतवाली में वर्ष 2010 में गैंगेस्टर एक्ट 
    7. मऊ जनपद के शहर कोतवाली में वर्ष 2012 में साजिश सहित धारा386
    8. शहर कोतवाली में ही वर्ष 2012 में गैंगेस्टर एक्ट 
    9. मऊ जनपद में दक्षिण टोला थाने में दोहरे हत्याकांड में वर्ष 2010 में बलवा, साजिश, हत्या के प्रयास और हत्या
    10. दक्षिण टोला थाने में वर्ष 2010 में ही गैंगेस्टर एक्ट 

    हनुमान की पत्नी पर भी दर्ज है एक मुकदमा:
    पुलिस रेकार्ड के अनुसार माफिया मुख्तार अंसारी गिरोह के शूटर हिस्ट्रीशीटर अपराधिक गैंग डी-5 के सदस्य हनुमान पांडेय की पत्नी सरोज लता पांडेय के विरुद्ध कोपागंज थाने में आठ जुलाई 2020 को तथ्यों को छिपाकर असलहे का लाइसेंस लेने के आरोप में पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

    रिश्तेदारों संग बेटा आकाश गया शव लेने :
    एनकाउंटर के बाद एसटीएफ की ओर से हनुमान पांडेय के घर पर फोन आया। फोन पर घटना क्रम बताते हुए कहा गया कि आकर शव ले जाओ। एनकाउंटर की जानकारी होते ही हनुमान के घर रोना धोना मच गया। हनुमान का इकलौता बेटा आकश शव लेने केलिए रिश्तेदारों संग लखनऊ चला गया।

    आकाश पढ़ाई पूरी करके खेती में दादा का हथ बंटाता है। हनुमान की पत्नी सरोज लता पांडेय आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री है। गांव और आस पास के क्षेत्र में हनुमान पांडेय का कोई आतंक नहीं था, वह सबसे बड़े ही आदर से मिलता और जरूरतमंदों की मदद करता था। उसके एनकाउंटर की सूचना मिलते ही उसके घर लोगों की भीड़ लग गई और सब घटना के बारे में जानने को उत्सुक दिखाई दे रहे थे।

    पिता ने उठाए सवाल:
    हनुमान पांडेय के पिता बालदत्त ने बेटे के एनकाउंटर करने के एसटीएफ के दावे पर सवाल उठाया। वृद्ध बालदत्त काक हना था कि हनुमान पर लगे अधिकांश मुकदमों में वह बरी हो गया था। वह अपनी बीमार मां के इलाज के लिए केजीएमयू में गया था। दो दिन पहले उसकी वहां से डिस्चार्ज हुई थी।

    उन्होंने बताया कि हनुमान से रात 11 बजे उनकी बात भी हुई, सब ठीक बता रहा था। इस बीच वह कब पुलिस से मुठभेड़ करने चला गया। आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे गोमती नगर घर से उठा ले गई और फर्जी एनकाउंटर दिखाकर मार डाला। उन्होंने एनकाउंटर की जांच कराने की मांग किया।

    मऊ जिले के एसपी अनुराग आर्य ने बताया कि हनुमान पांडेय के विरुद्ध प्रदेश के कई जिलों में कुल 12 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें मऊ में मन्ना सिंह हत्या कांड के मुकमे में हनुमान बरी हो गया था जबकि और बाकी मुकदमे विचाराधीन हैं।

    इसके खिलाफ मऊ जिले में शहर कोतवाली और दक्षिण टोला थाने में हत्या और गैंगेस्टर सहित पांच मुकदमे दर्ज हैं। इसके विरुद्ध दक्षिण टोला थाने में एक सिपाही सहित दो व्यक्तियों की हत्या का मुकदमा भी दर्ज है। हनुमान की पत्नी सरोजलता के खिलाफ कोपागंज थाने में धोखाधड़ी करके असलहे का लाइसेंस बनवा लेने के आरोप में मुकदमा दर्ज है।

    वर्ष 2005 में उस समय मऊ जिले के लीलारी भरौली गांव के लोगों ने जाना कि रिटायर फौजी बालदत्त पांडेय के बडे बेटे राकेश पांडेय उर्फ हनुमान को वे सीधा सदा युवक समझते थे, उसके संबंध कुख्यात अपराधियों से भी हैं। तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई की टीम को हनुमान की संलिप्तता के संकेत मिले तो टीम ने रात में हनुमान के घर पर छापा मारा था। हालांकि उस समय सीबीआई की टीम मौके पर राकेश उर्फ हनुमान नहीं मिला।

    हत्याकांड में शामिल बदमाश सीबीआई टीम के आने की भनक पहले ही लगने पर वह वहां से फरार हो गया था। लेकिन सीबीआई के हाथ हनुमान के शामिल रहने से लेकर हत्या के बाद बदमाशों के असलहों सहित अपने घर संरक्षण देने के पुख्ता संकेत मिले थे। सर्विलांस के माध्यम से सीबीआई ने ये तथ्य जुटाए थे। गांव के लोग उस समय हैरत में पड़ गए थे। फिर तो हनुमान का नाम मुख्तार के करीबी बड़े अपराधियों में शामिल हो गया।

    वर्ष 2009 में 29 अगस्त की शाम को जिले में पीडब्ल्यूडी के ए क्लास ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की हत्या में भी मुख्तार के करीबी शूटर हनुमान पांडेय का नाम आया। शहर के व्यस्ततम गाजीपुर तिराहा पर 29 अगस्त 2009 की सरेशाम गोलियों से छलनी करके मन्ना सिंह की हत्या कर दी गई थी।



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